The Third Eye Chakra: तीसरी आंख का रहस्य क्या है?

The Third Eye Chakra: तीसरी आंख या Third Eye आपके माथे के बीचों बीच स्थित एक ऊर्जा केंद्र है। इसे Inner Eye या Minds Eye भी कहा जाता है। अगर दुनिया की सबसे रहस्यमई चीजों की बात की जाए तो ऐसा हो ही नहीं सकता कि उसमें हमारे तीसरे नेत्र का जिक्र न हो।

कहा जाता है कि तीसरी आंख वह शक्ति है जो अगर जागरूक हो जाए तो आप ब्रम्हांड के वो रहस्य जान सकते हैं जो एक सामान्य मनुष्य कभी नहीं जान पाएगा। अध्यात्म में इस तीसरे नेत्र का बहुत महत्त्व है, और इसे अज्ना चक्र या दिव्य चक्षु के नाम से भी जाना जाता है। वहीं तीसरे नेत्र का होना विज्ञान ने भी मान्य किया है और वह इसे पीनियल ग्लैंड के नाम से जानते हैं।

आज हम इस लेख में कुछ आप तीसरी आंख से जुड़े कुछ ऐसे आश्चर्यजनक तथ्य जानेंगे जो कुछ समय के लिए आपको एक बार फिर से इस भौतिक दुनिया के नियमों के बारे सोचने पर मजबूर कर देंगे। तो आइए जानते हैं तीसरी आंख से जुड़े कुछ रोचक तथ्य।

The Third Eye Chakra: तीसरे नेत्र से जुड़े अलौकिक तथ्य।

तीसरी आंख मानव शरीर में निर्माण होने वाला सबसे पहला अंग है।

तीसरी आंख इंसानी शरीर में बनने वाला सबसे पहला अंग है जिसकी निर्मिति गर्भधारणा के 49 वे दिन होता है। 49 वे दिन ही यह तय होता है कि लड़का होगा या लड़की। बौद्ध धर्म के अनुसार 49 वे दिन ही शरीर में आत्मा का प्रवेश होता है।

तीसरी आंख में होता है आत्मा का निवास।

फ्रेंच फिलोसोफर रेने डिस्कार्ट्स दुनिया के कुछ महान फिलॉसोफेर्स में से एक हैं। रेने डिस्कार्ट्स ने पीनियल ग्लैंड को The Seed Of The Soul भी कहा है। यानी की जहां हमारी आत्मा का निवास होता है।

तीसरी आंख दो दुनियाओं के बीच एक पुल का काम करता है।

कहा जाता है कि जब कोई आदमी मौत के काफी करीब होता है तो उसका पीनियल ग्लैंड एक बड़ी मात्रा में DMT Chemical जिसे The Spirit Molecule भी कहा जाता है बनाने लगता है। ताकि उस इंसान की आत्मा इस दुनिया से निकलकर आत्माओं की दुनियां में जा सके।

इंसानों जैसे जानवरों में भी होती तीसरी आंख।

दुनियां के हर जानवर के अंदर तीसरी आंख पाई जाती है, और वह इंसान के मुकाबले ज्यादा प्रगत होती है। यही कारण है कि किसी भी आपदा के आने का पता जानवरों को पहले ही चल जाता है।

The Third Eye Chakra: तीसरी आंख कैसे खोलें?

तीसरी आंख और गांजा (Cannabis) का संबंध।

बेहद Concentration के साथ किए गए ध्यान से पीनियल ग्लैंड एक तरह का कैमिकल पैदा करता है। यही कैमिकल गांजे में भी पाया जाता है। यही कारण है कि कई साधू संत गांजा पीते हैं ताकि वह तेजी से अपना तीसरे नेत्र खोल सकें।

ब्रम्हचर्य के पालन से बेहद कम समय में तीसरी आंख खोली जा सकती है।

हमारे तीसरे नेत्र का सीधा संबंध हमारे Reproductive System से होता है। जब कोई इंसान Sexual Activity में Involve होता है तो हमारी एनर्जी नीचे की तरफ बहना शुरू कर देती है। और जो लोग Sexual Activity से दूर रहते हैं उनकी एनर्जी ऊपर की तरफ बहना शुरू कर देती है। जिससे उनकी तीसरी आंख बेहद कम समय में Activate हो जाती है। यही कारण है कि हमारे सूफी संत ब्रम्हचर्य का पालन किया करते थे।

सिर्फ ध्यान द्वारा ही तीसरे नेत्र को जागृत किया जा सकता है।

सिर्फ मेडिटेशन के द्वारा ही तीसरे नेत्र को खोला जा सकता है। इसके अलावा ध्यान के साथ योग करने से तीसरे नेत्र को तेजी से जागृत किया जा सकता है। त्राटक, बालासन, ताड़ासन इन आसनों नियमित अभ्यास करने से कई आध्यात्मिक अनुभवों को प्राप्त किया जा सकता है।

मात्र 0.2 ग्राम के पीनियल ग्लैंड का मोल आप यूं लगा सकते हैं कि हमारा शरीर भी शरीर का सबसे साफ रक्त पीनियल ग्रंथि को ही सप्लाई करता है। एक आम मनुष्य शायद ही अज्ना चक्र के महत्त्व को समझ पाए, लेकिन एक साधक अपना पूरा जीवन लगा देता है इस दिव्य चक्षु को सिध्द करने के लिए। क्योंकि अगर एक बार यह सिध्दि मिल जाए तो वो क्या पाएगा यह वो भली भांति जानता है।

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